रुद्राक्ष का महत्व और उत्पत्ति क्या है?
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रुद्राक्ष = शिव के हजारों वर्षों की तपस्या के बाद नेत्र खोलने पर गिरे अश्रुओं से उत्पन्न। मंत्रों के सूक्ष्म स्पंदन अवशोषित कर चेतना ऊर्ध्वगामी बनाता है। एकमुखी = परब्रह्म; पंचमुखी = पाप नाश; चतुर्दशमुखी = परम शिव स्वरूप।
- 1एकमुखी: परब्रह्म स्वरूप (ॐ ह्रीं नमः)
- 2पंचमुखी: कालाग्निरुद्र स्वरूप, समस्त पापों का नाश और मुक्ति (ॐ ह्रीं नमः)
- 3षष्ठमुखी: कार्तिकेय स्वरूप, ब्रह्महत्या जैसे दोषों से मुक्ति (ॐ ह्रीं हुं नमः)
- 4चतुर्दशमुखी: परम शिव स्वरूप, सिर पर धारण करने से अमोघ फल (ॐ नमः)
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