विस्तृत उत्तर
वराह अवतार का रूप अत्यंत विशाल, पर्वताकार और दिव्य था। मत्स्य पुराण के अनुसार भगवान का वराह रूप सौ योजन चौड़ा और दो सौ योजन ऊँचा था। वे विशाल नीले पर्वत के समान थे। उनकी गर्जना बादलों की गड़गड़ाहट जैसी थी और उनके श्वेत दांत अत्यंत तीक्ष्ण थे। उनका तेज सूर्य, अग्नि और बिजली के समान चकाचौंध करने वाला था। उनके कंधे पुष्ट थे और उनकी चाल उन्मत्त बाघ या वृषभ के समान थी। इसी विराट रूप में भगवान रसातल की गहराइयों में प्रवेश कर पृथ्वी का उद्धार करने गए।
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