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विस्तृत उत्तर
सूर्य अर्घ्य के पश्चात् घर के पूजा स्थल, मंदिर में या यज्ञशाला में भगवान सूर्य, शिव और विष्णु की संयुक्त पूजा का विधान है।
मत्स्य पुराण' में स्पष्ट निर्देश है कि साधक को ब्रह्मा, विष्णु, महेश और सूर्य में कोई भेद नहीं देखना चाहिए। मकर संक्रांति अभेद-दर्शन का पर्व है।
मत्स्य पुराण का अभेद-दर्शन श्लोक:
यथा भेदं न पश्यामि शिवविष्ण्वर्कपद्मजान्। तथा ममास्तु विश्वात्मा शंकर: शंकर: सदा॥
अर्थ: जिस प्रकार मैं शिव, विष्णु, सूर्य (अर्क) और ब्रह्मा (पद्मज) में कोई भेद नहीं देखता, उसी प्रकार विश्व की अंतरात्मा स्वरूप भगवान शंकर सदा मेरे लिए कल्याणकारी हों।
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