अभेद दर्शनमत्स्य पुराण का 'यथा भेदं न पश्यामि' श्लोक का क्या अर्थ है?'यथा भेदं न पश्यामि शिवविष्ण्वर्कपद्मजान्...' अर्थ: जैसे मैं शिव, विष्णु, सूर्य और ब्रह्मा में कोई भेद नहीं देखता — वैसे ही विश्वात्मा शंकर (जो कल्याण करे = शं कल्याणं करोति) सदा मेरे लिए कल्याणकारी हों।#यथा भेदं#अभेद दर्शन#शंकर अर्थ
अभेद दर्शनमकर संक्रांति पर शिव, विष्णु और सूर्य एक साथ क्यों पूजे जाते हैं?मत्स्य पुराण: ब्रह्मा, विष्णु, महेश और सूर्य में कोई भेद नहीं — मकर संक्रांति अभेद-दर्शन का पर्व। श्लोक: 'यथा भेदं न पश्यामि शिवविष्ण्वर्कपद्मजान्...' — शिव, विष्णु, सूर्य, ब्रह्मा सब एक हैं।#अभेद दर्शन#शिव विष्णु सूर्य#मत्स्य पुराण