विस्तृत उत्तर
शास्त्रों के अनुसार, उग्र भैरव साधना के स्थान पर गृहस्थों को भगवान भैरव के सौम्य और बाल रूप 'बटुक भैरव' की उपासना करनी चाहिए। 'बटुक' का अर्थ है बालक। ये सुकुमार, दिगंबर (बालकवत) हैं और इनके हाथों में डमरू और खप्पर होता है। ये अपने भक्तों की निश्छल भाव से एक बालक की तरह रक्षा करते हैं। गृहस्थों को घर में शमशान भैरव जैसी अत्यंत उग्र प्रतिमा नहीं रखनी चाहिए।





