विस्तृत उत्तर
शास्त्रों के अनुसार, गृहस्थों को घर में केवल 'दक्षिणा काली' की ही मूर्ति या चित्र (फोटो) रखना चाहिए और इन्हीं की उपासना शनिवार को करनी चाहिए। दक्षिणा काली की पहचान यह है कि उनका दाहिना पैर (Right Foot) शिव की छाती पर आगे होता है। इनका मुख प्रसन्न मुद्रा में होता है और वे भक्तों को वर और अभय प्रदान करती हैं। यह माता का कल्याणकारी और पालन-पोषण करने वाला रूप है जिसे कृष्णानंद आगमवागीश ने जनमानस के लिए सुलभ कराया था।





