का सरल उत्तर
असितांग भैरव अष्ट भैरवों में तृतीय स्थान पर हैं — वे पूर्व दिशा के संरक्षक (दिक्पाल) हैं और ज्ञान, सृजनात्मकता तथा शाप-निवृत्ति से संबंधित हैं।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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