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पूजा विधि📜 धर्म सिंधु, वास्तु शास्त्र, आगम शास्त्र — मूर्ति स्थापन1 मिनट पठन

पूजा में भगवान की मूर्ति किस दिशा में रखें?

संक्षिप्त उत्तर

मूर्ति की दिशा: पूर्वाभिमुख — सर्वश्रेष्ठ। मूर्ति पूर्व में हो तो पूजक पश्चिम में बैठे (पूर्व मुख)। ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में मंदिर — श्रेष्ठ वास्तु। दक्षिण-पश्चिम में मंदिर न बनाएं।

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विस्तृत उत्तर

मूर्ति की दिशा का नियम धर्म सिंधु और वास्तु शास्त्र में वर्णित है:

मूर्ति का मुख

  • पूर्वाभिमुख — सर्वश्रेष्ठ; सूर्य की दिशा
  • पश्चिमाभिमुख — दूसरा विकल्प

पूजक की दिशा

  • मूर्ति पूर्वाभिमुख हो तो पूजक पश्चिम में बैठे — पूर्व मुख
  • मूर्ति पश्चिमाभिमुख हो तो पूजक पूर्व में — पश्चिम मुख

वास्तु शास्त्र

  • ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में मंदिर — मूर्ति का मुख दक्षिण या पश्चिम
  • नैऋत्य (दक्षिण-पश्चिम) में मंदिर न बनाएं

देवता अनुसार

  • सभी सामान्य देव — पूर्वाभिमुख
  • गणेश — पूर्व या उत्तर
  • शनि — पश्चिम

धर्म सिंधु

मूर्तेः पूर्वाभिमुखत्वं उत्तमम्।' — मूर्ति का पूर्वाभिमुख होना उत्तम।
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शास्त्रीय स्रोत
धर्म सिंधु, वास्तु शास्त्र, आगम शास्त्र — मूर्ति स्थापन
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