मंत्र जप नियममंत्र जप करते समय किस दिशा में मुख करके बैठना चाहिए?पूर्व = सर्वसाधारण (सूर्योदय/ऊर्जा)। उत्तर = शिव/ज्ञान/धन (कैलाश)। दक्षिण = वर्जित (यम)। शिव=उत्तर, देवी=पूर्व, विष्णु=पूर्व, सूर्य=पूर्व।#दिशा#मुख#जप
पूजा विधिपूजा में भगवान की मूर्ति किस दिशा में रखें?मूर्ति की दिशा: पूर्वाभिमुख — सर्वश्रेष्ठ। मूर्ति पूर्व में हो तो पूजक पश्चिम में बैठे (पूर्व मुख)। ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में मंदिर — श्रेष्ठ वास्तु। दक्षिण-पश्चिम में मंदिर न बनाएं।#मूर्ति दिशा#पूर्व
पूजा विधिपूजा के दौरान दीपक किस दिशा में रखें?दीपक दिशा: भगवान के दाहिनी ओर। लौ का मुख पूर्व दिशा में। दक्षिण दिशा में दीपक वर्जित (यम की दिशा)। संध्या में ईशान कोण में दीप जलाएं — लक्ष्मी प्रवेश। आरती का दीपक दक्षिणावर्त घुमाएं।#दीपक दिशा#दाहिनी ओर#पूर्व
पूजा विधिपूजा में किस दिशा में बैठना चाहिए?पूजा में दिशा: पूर्व मुख — सर्वोत्तम (सूर्य की दिशा, ज्ञान और प्रकाश)। उत्तर मुख — कुबेर और ध्रुव की दिशा (दूसरा विकल्प)। दक्षिण मुख — पितृ तर्पण में; देव पूजा में वर्जित। भाव और श्रद्धा दिशा से अधिक महत्वपूर्ण है।#दिशा#बैठना#पूर्व
शिव पूजा नियमशिव की पूजा में दिशा का क्या महत्व है — उत्तर या पूर्व?उत्तर सर्वोत्तम (कैलाश दिशा), पूर्व भी शुभ, ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) सर्वश्रेष्ठ। जलाधारी मुख उत्तर अनिवार्य। मुख उत्तर/पूर्व, पीठ दक्षिण/पश्चिम।#दिशा#उत्तर#पूर्व