विस्तृत उत्तर
प्रसाद भगवान की कृपा का प्रतीक है और इसका सम्मान अनिवार्य है, परंतु स्वास्थ्य भी ईश्वरीय देन है।
मूल सिद्धांत
प्रसाद का सम्मान करें, परंतु खराब/सड़ा प्रसाद खाकर स्वास्थ्य न बिगाड़ें।
बासी प्रसाद — क्या खा सकते हैं
- 1सूखा प्रसाद (बताशे, मिश्री, चना, सूखे मेवे, सूखा पंजीरी) — कई दिनों तक खाद्य योग्य रहता है। खा सकते हैं।
- 2मिठाई (बर्फी, लड्डू) — 1-2 दिन (कमरे के तापमान पर); फ्रिज में 3-5 दिन। सुगंध और स्वाद ठीक हो तो खा सकते हैं।
- 3फल — फल की स्थिति देखें। कटा फल उसी दिन खाएं।
बासी प्रसाद — क्या न खाएं
- 1फफूंद/कवक लगा हो — फेंकें नहीं, तुलसी/पीपल जड़ में रखें।
- 2दुर्गंध आ रही हो — विसर्जित करें।
- 3खट्टा/कड़वा स्वाद आ गया हो।
- 4पंचामृत — उसी दिन ग्रहण करें; बासी पंचामृत न पिएं (दूध-दही खराब होते हैं)।
खराब प्रसाद का विसर्जन
- ▸तुलसी के पौधे या पीपल की जड़ में
- ▸बहते जल में
- ▸गाय या पक्षियों को खिलाएं (यदि खाद्य हो)
- ▸कूड़ेदान या नाली में न फेंकें
शास्त्रीय दृष्टिकोण
किसी भी शास्त्र में खराब भोजन खाने की बाध्यता नहीं है। प्रसाद का सम्मान उसे समय पर ग्रहण करने और शेष को उचित तरीके से विसर्जित करने में है।





