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विस्तृत उत्तर
श्राद्ध द्वादशी को इसलिए करना चाहिए क्योंकि एकादशी के दिन श्राद्ध कर्म वर्जित बताया गया है। ब्रह्मवैवर्त पुराण और गरुड़ पुराण के अनुसार एकादशी श्राद्ध करने पर कर्ता, पितर और पुरोहित तीनों नरकगामी होते हैं। इसलिए श्राद्ध एकादशी के अगले दिन, अर्थात द्वादशी को ही किया जाना चाहिए।
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