विस्तृत उत्तर
सोमानंदीश्वर शिवलिंग की स्थापना भगवान शिव के अत्यंत शक्तिशाली और उग्र गण 'सोमनंदी' ने की थी। इसका सबसे विस्तृत और प्रामाणिक उल्लेख स्कंद पुराण के काशी खंड (उत्तरार्ध) के अध्याय 53 (शिव के गणों का वाराणसी प्रस्थान) में प्राप्त होता है।
कथा के अनुसार, प्राचीन काल में धर्मात्मा राजा दिवोदास के शासनकाल में भगवान शिव मंदराचल पर्वत पर थे। शिव ने राजा को विचलित करने के लिए सोमनंदी सहित पाँच उग्र गणों को काशी भेजा। परंतु राजा के अडिग धर्म के समक्ष वे विफल रहे। काशी के पारलौकिक और शांत प्रभाव ने इन उग्र शिवगणों के चित्त को इस प्रकार मोहित कर लिया कि वे अपना मूल उद्देश्य भूल गए। सोमनंदी ने नंदीवन (आनंदकानन का एक पावन क्षेत्र) में शिवलिंग की स्थापना कर घोर तपस्या की, वही कालांतर में 'सोमानंदीश्वर लिंग' कहलाया। शिव ने इसे अपनी ही उपस्थिति का विस्तार माना।





