काशी के शिवलिंगकाशी में कुक्कुटेश्वर शिवलिंग की स्थापना किसने की थी?इसकी स्थापना भगवान शिव के प्रिय 'कुक्कुट' नामक शिव गण ने की थी। इसका वर्णन स्कंद पुराण के काशी खंड (अध्याय 53) में मिलता है, जहाँ कुक्कुट गण काशी की दिव्यता से मोहित होकर यहीं बस गए और शिवलिंग स्थापित किया।#कुक्कुटेश्वर शिवलिंग#शिव गण कुक्कुट#स्कंद पुराण
काशी के शिवलिंगकाशी में पिंगलेश्वर शिवलिंग किसने स्थापित किया था?इसकी स्थापना साक्षात् शिव के अत्यंत तेजस्वी अनुचर 'पिंगल गण' ने की थी। इसका ऐतिहासिक प्रमाण स्कंद पुराण के काशी खंड में मिलता है।
तुलनात्मक अध्ययनशिवगण 'नंदीषेण' और 'सोमनंदिन' में क्या मुख्य अंतर है?ये दोनों अलग-अलग शिवगण हैं। सेनानायक 'नंदीषेण' ने 'नंदीशेनेश्वर लिंग' स्थापित किया था, जबकि 'सोमनंदिन' ने नंदवन में 'सोमनंदीश्वर लिंग' की स्थापना की थी।#नंदीषेण#सोमनंदिन#शिवगण
काशी के शिवलिंगकाशी में नंदीशेनेश्वर शिवलिंग किसने स्थापित किया था?इस शिवलिंग की स्थापना शिव के पराक्रमी गण 'नंदीषेण' ने की थी, जिसका प्रामाणिक उल्लेख स्कंद पुराण के काशी खंड (अध्याय 53-54) में प्राप्त होता है।#नंदीशेनेश्वर शिवलिंग#शिवगण नंदीषेण#स्कंद पुराण
काशी के शिवलिंगकाशी के नंदीवन में सोमानंदीश्वर शिवलिंग की स्थापना किसने की और इसका प्रामाणिक उल्लेख किस पुराण में है?इसकी स्थापना भगवान शिव के उग्र गण 'सोमनंदी' ने की थी। इसका प्रामाणिक उल्लेख स्कंद पुराण के काशी खंड (अध्याय 53) में प्राप्त होता है, जब शिव ने गणों को राजा दिवोदास की परीक्षा लेने काशी भेजा था।#सोमानंदीश्वर शिवलिंग#शिव गण सोमनंदी#स्कंद पुराण
काशी के शिवलिंगकाशी खंड अध्याय 69 में शंकुकर्णेश्वर का क्या स्थान है — 68 मोक्षदायी शिवलिंगकाशी खंड अध्याय 69 में 68 मोक्षदायी शिवलिंगों में शंकुकर्णेश्वर 'महातेज लिंग' के रूप में वर्णित हैं। कुरुक्षेत्र का स्थाणु, नैमिषारण्य का देवदेव लिंग भी इनमें हैं। श्लोक 173 — इनके नाम सुनने मात्र से हजारों जन्मों के पाप नष्ट।#काशी खंड#अध्याय 69#68 शिवलिंग
पौराणिक कथाएँराजा दिवोदास के कारण शिव ने काशी क्यों छोड़ी थी?दिवोदास के राजकाल में शिव मंदराचल गए। काशी की स्थिति जानने को योगिनियाँ, सूर्य, ब्रह्मा भेजे — सब काशी की माया में मुग्ध होकर लौटे नहीं। फिर घंटाकर्ण-महोदर को भेजा — वे भी मोहित होकर रुक गए और शिवलिंग स्थापित कर दिए।#दिवोदास#काशी#शिव
काशी के शिवलिंगकाशी में शिवगणों द्वारा स्थापित शिवलिंगों की सूचीकाशी खंड के अनुसार — दंडपाणि ने दंडीश्वर, घंटाकर्ण ने घंटाकर्णेश्वर, वीरभद्र ने वीरभद्रेश्वर, कुण्डोदर ने कुण्डोदरेश्वर, महाकाल ने महाकालेश्वर, क्षेमक ने क्षेमेश्वर, पंचशीर्ष ने पंचशिखेश्वर की स्थापना की।#शिवगण#काशी#शिवलिंग
पुराण ज्ञानस्कंद पुराण सबसे बड़ा पुराण क्यों है?स्कन्द पुराण में ८१,१०० श्लोक हैं — किसी अन्य पुराण से अधिक, इसीलिए यह सबसे बड़ा है। इसमें ६ खण्ड हैं। काशी, जगन्नाथ, महाकाल, रामेश्वर जैसे तीर्थों की महिमा, नदियों की उद्गम-कथाएँ, सत्यनारायण व्रत और शिवरात्रि का वर्णन है।#स्कंद पुराण#सबसे बड़ा पुराण#कार्तिकेय