विस्तृत उत्तर
स्कंद पुराण के 'काशी खंड' (अध्याय 53) के अनुसार, जब भगवान शिव ने राजा दिवोदास के राज्य का निरीक्षण करने के लिए अपने शिव गणों को काशी भेजा, तो उनमें से एक अत्यंत तेजस्वी, योग-निष्ठ और उग्र गण 'पिंगल' भी थे। पिंगल काशी के श्मशान-तुल्य शांत और वैराग्यपूर्ण वातावरण से प्रभावित होकर वहीं रुक गए। उन्होंने कपर्दीश्वर लिंग के समीप एकांत स्थान पर अपने इष्ट शिव के निमित्त इस शिवलिंग की स्थापना की और घोर तपस्या की। साक्षात् शिव गण द्वारा स्थापित होने के कारण ही यह 'पिंगलेश्वर' कहलाया।





