श्राद्ध एवं पितरघंटाकर्ण हृद में पितृ तर्पण का क्या महत्त्व है?स्कंद पुराण के अनुसार इस तीर्थ पर श्राद्ध करने से सात पीढ़ियों के नरकवासी पूर्वजों का उद्धार होता है। पितर स्वयं कामना करते हैं कि कोई वंशज इस जल से तिलांजलि दे। अन्न-दान और औषधि-दान विशेष पुण्यदायी।#पितृ तर्पण#घंटाकर्ण हृद#श्राद्ध
काशी के तीर्थघंटाकर्ण हृद में स्नान और दर्शन की फलश्रुति — स्कंद पुराणतीन फलश्रुतियाँ — (१) जन्म-मृत्यु चक्र से मुक्ति, (२) कहीं भी मरने पर काशी-मरण का पुण्य, (३) सात पीढ़ियों के नरकवासी पितरों का उद्धार। पितर स्वयं कामना करते हैं कि कोई इस तीर्थ से तिलांजलि अर्पित करे।
काशी के तीर्थघंटाकर्ण हृद (कर्णघंटा तालाब) क्या है और इसमें स्नान का क्या फल है?घंटाकर्ण हृद शिवगण घंटाकर्ण द्वारा स्वयं खोदा गया पवित्र कुंड है (K 60/67)। स्कंद पुराण कहता है — इसमें स्नान कर एकाग्र होने पर विश्वनाथ की आरती के घंटों का दिव्य नाद सुनाई देता है।#घंटाकर्ण हृद#कर्णघंटा तालाब#काशी तीर्थ