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विस्तृत उत्तर
पितरों का एक दिन मनुष्यों के एक कृष्णपक्ष के बराबर बताया गया है। शुक्लपक्ष को पितरों की स्वप्नसम्बन्धी रात के समान कहा गया है। इस तरह पितृ-काल की गणना मनुष्य-पक्षों के आधार पर की गई है। यहाँ कृष्णपक्ष दिन और शुक्लपक्ष रात के रूप में रखे गए हैं। पितरों के दिन-रात को इसी पक्ष-क्रम से समझाया गया है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 4, PDF पृष्ठ 25, श्लोक 10-11
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