शास्त्रीय प्रमाण और फलश्रुति'धर्मार्थकाममोक्षाख्या' श्लोक का क्या अर्थ है?
'धर्मार्थकाममोक्षाख्या...' का अर्थ: रसराज (पारद) की कृपा से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष — चारों पुरुषार्थों की सिद्धि होती है, इसमें लेशमात्र संदेह नहीं।
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