विस्तृत उत्तर
भारतीय अध्यात्म, तंत्र और रसशास्त्र में पारद (पारा) को साक्षात् शिव का स्वरूप माना गया है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, इसे भगवान शिव का 'वीर्य' (जीव-तत्व) माना गया है।
यही कारण है कि पारद से निर्मित शिवलिंग को 'जीवंत धातु' या 'रसलिंग' की संज्ञा दी जाती है और इसका माहात्म्य अन्य सभी प्रकार के शिवलिंगों से श्रेष्ठतर माना गया है।





