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विस्तृत उत्तर
तंत्र शास्त्र साधकों को तीन भावों या स्वभावों में वर्गीकृत करता है:
- 1पशु-भाव: वह अवस्था जिसमें व्यक्ति सामाजिक नियमों, भय, लज्जा और घृणा जैसे बंधनों (पाश) में जकड़ा रहता है।
- 1वीर-भाव: वह साधक जिसमें अपने भीतर के अंधकार, भय, कामनाओं और घृणा का सीधे सामना करने का साहस होता है।
- 1दिव्य-भाव: वह अवस्था जब साधक समस्त संघर्षों से पार होकर सहज ही दिव्यता, प्रेम और करुणा में स्थित हो जाता है।
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