📖
विस्तृत उत्तर
जनलोक के अधिकारी वे आत्माएँ होती हैं जो मोह, माया, सांसारिक इच्छाओं और स्वर्ग के भोगों से ऊपर उठ चुकी होती हैं। जो साधक विशुद्ध सत्त्वगुण में स्थित होकर निष्काम कर्मयोग, ध्यान योग, कठोर तपस्या, संन्यास और अखंड नैष्ठिक ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं, वे जनलोक को प्राप्त होते हैं। जनलोक उन सन्यासियों और योगियों का गंतव्य है जो काम, क्रोध और भौतिक आसक्तियों से मुक्त हो चुके हैं।
🔗
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक
इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें
क्या यह उत्तर सहायक था?



