तंत्र शास्त्र साधकों को कितने भावों में वर्गीकृत करता है?
की चेकलिस्ट
तंत्र शास्त्र साधकों को तीन भावों में वर्गीकृत करता है: (1) पशु-भाव — बंधनों में जकड़ा, (2) वीर-भाव — भय का सीधा सामना करने वाला, (3) दिव्य-भाव — दिव्यता-प्रेम-करुणा में स्थित।
- 1पशु-भाव: वह अवस्था जिसमें व्यक्ति सामाजिक नियमों, भय, लज्जा और घृणा जैसे बंधनों (पाश) में जकड़ा रहता है।
- 2वीर-भाव: वह साधक जिसमें अपने भीतर के अंधकार, भय, कामनाओं और घृणा का सीधे सामना करने का साहस होता है।
- 3दिव्य-भाव: वह अवस्था जब साधक समस्त संघर्षों से पार होकर सहज ही दिव्यता, प्रेम और करुणा में स्थित हो जाता है।
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श्रेणी
तांत्रिक विश्व दृष्टि और तीन भाव
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