विस्तृत उत्तर
इस व्रत के मुख्य देवता भगवान 'अनन्त' हैं, जिन्हें भगवान विष्णु या श्रीकृष्ण का ही स्वरूप माना गया है। पूजा में मुख्य रूप से दो स्वरूपों की प्रधानता रहती है: पहले 'शेषनाग' जो काल के प्रतीक हैं और ब्रह्मांड की रक्षा करते हैं, और दूसरे 'श्री हरि विष्णु' जो पुरुषोत्तम स्वरूप हैं और योगनिद्रा में स्थित होकर जगत का आधार बने हुए हैं।





