विस्तृत उत्तर
तुलसी के बिना विष्णु पूजा अधूरी इसलिए मानी जाती है क्योंकि भगवान विष्णु ने स्वयं तुलसी को अपने पूजन में अनिवार्य स्थान दिया। वृंदा, जो विष्णु की परम भक्त थी, अपने त्याग और तप के बाद तुलसी रूप में प्रकट हुई। भगवान ने उसके सम्मान में कहा कि उनका कोई भी भोग, पूजा या अनुष्ठान तुलसी दल के बिना पूर्ण नहीं होगा। इसलिए चाहे शालिग्राम पूजा हो, कृष्ण पूजन हो या विष्णु सहस्रनाम अर्चन, तुलसी पत्र का विशेष महत्व रहता है। यह परंपरा केवल धार्मिक नियम नहीं, बल्कि वृंदा की भक्ति और भगवान के प्रायश्चित की स्मृति है।
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