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विस्तृत उत्तर
इस कथा में शेषनाग समय के अनंत और चक्रीय स्वरूप के प्रतीक हैं। सृष्टि आती है और जाती है, लेकिन अनंत आधार बना रहता है। विष्णु का शेषनाग पर शयन बताता है कि परम चेतना समय से ऊपर स्थित है। इसलिए शेषनाग को काल की अनंतता और सृष्टि के स्थायी आधार से जोड़ा गया है।
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