विस्तृत उत्तर
इस स्नान का सबसे अनिवार्य और शास्त्र-विहित अंग है 'अर्क-पत्र' (आक या मदार के पत्ते) का प्रयोग। 'अर्क' सूर्य का ही एक पर्याय है और इन पत्तों में सूर्य की ऊर्जा समाहित मानी जाती है। शास्त्रीय विधि के अनुसार, व्रती स्नान करते समय अर्क (श्वेतार्क) के 7 पत्तों को अपने शरीर पर रखता है— 1 सिर पर, 2 दोनों कंधों पर, 2 घुटनों पर और 2 पैरों पर। इसके बाद सात जन्मों के पापों और सात प्रकार की व्याधियों को दूर करने वाला विशेष श्लोक (यद्यज्जन्मकृतं पापं...) पढ़कर जल डाला जाता है।





