विस्तृत उत्तर
शास्त्रों के अनुसार शेषनाग पृथ्वी के आधार हैं और भगवान विष्णु की शय्या के रूप में वे ब्रह्मांड की रक्षा करते हैं। अनन्त चतुर्दशी पर वे 'काल' के प्रतीक माने जाते हैं। पूजा के समय दूर्वा (घास) के सात कणों (फणों) से शेषजी की प्रतिमा बनाई जाती है और कलश पर रखकर उनकी विशेष पूजा की जाती है।





