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विस्तृत उत्तर
इस कथा में माधव ने धनतेरस पर कांस्य कलश में मुद्राएँ रखकर माता लक्ष्मी की उपासना की। कलश को पूर्णता, मंगल और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसलिए धनतेरस पर कलश रखना लक्ष्मी के आदरपूर्ण स्वागत का एक रूप माना गया।
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