विस्तृत उत्तर
वरूथिनी एकादशी विशेष रूप से भगवान विष्णु के 'वराह स्वरूप' (वराह अवतार) को समर्पित है। वराह अवतार भगवान के उस महा-पराक्रम का प्रतीक है जब उन्होंने पृथ्वी को प्रलय के जल से बाहर निकाला था। इस दिन भगवान की षोडशोपचार विधि से पूजा करनी चाहिए। दक्षिणावर्ती शंख में दूध और गंगाजल भरकर या पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) से उनका अभिषेक करना चाहिए। पूजा में पीला चंदन, पीले फल (केला, आम), केसरिया भात (सामा के चावल का) और पीली मिठाइयां चढ़ानी चाहिए। अक्षत (चावल) की जगह सफेद तिल का प्रयोग करना चाहिए।





