विस्तृत उत्तर
अग्नि पुराण (अध्याय 322) के अनुसार, पाशुपतास्त्र स्तोत्रम का पाठ सामान्य विघ्न-निवारण, शांति और सुखद जीवन के लिए 21 दिनों तक सुबह-शाम 21 बार करने का विधान है।
विघ्न निवारण के लिए इस स्तोत्र का 21 दिनों तक सुबह-शाम 21 बार पाठ करने का विधान है।
अग्नि पुराण (अध्याय 322) के अनुसार, पाशुपतास्त्र स्तोत्रम का पाठ सामान्य विघ्न-निवारण, शांति और सुखद जीवन के लिए 21 दिनों तक सुबह-शाम 21 बार करने का विधान है।
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