उत्तर-पूजनशिव पूजा में क्या-क्या भोग लगाते हैं?शिव को भोग: ऋतुफल, मिठाई, दूध की खीर, भांग का भोग। मुख शुद्धि: ताम्बूल (पान, लौंग, इलायची, सुपारी) — यश-कीर्ति देता है। शिव को प्रिय पुष्प: श्वेत पुष्प, मदार, कनेर, धतूरा।#शिव नैवेद्य#भांग#खीर
पूजा सामग्रीचन्द्रदोष निवारण के लिए शिव को कौन सी विशेष सामग्री चढ़ाएं?चन्द्रदोष निवारण के लिए शिव को सफेद चंदन, शक्कर और खीर (श्वेत वस्तुएं) विशेष रूप से अर्पित करें — ये चन्द्रमा की सौम्यता और शीतलता का प्रतीक हैं।#चन्द्रदोष सामग्री#सफेद चंदन#खीर
पूजन विधानअनंत चतुर्दशी की पूजा में मालपुआ और खीर का भोग क्यों लगता है?अग्नि पुराण के नियम के अनुसार इस दिन लगभग 1 किलो आटे का मालपुआ बनाना चाहिए, जिसका आधा हिस्सा ब्राह्मण को दान देना और आधा खुद प्रसाद के रूप में खाना शुभ माना गया है।#मालपुआ#खीर#अग्नि पुराण
पर्वशरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की किरणों में औषधीय गुण होते हैं क्याहाँ (मान्यता + कुछ शोध)। गीता 15.13: चन्द्रमा औषधि पोषक। 16 कलाओं से पूर्ण। BHU: लैक्टिक अम्ल+स्टार्च चन्द्रकिरण अवशोषित। आयुर्वेद: शरद पित्त+चन्द्र शीतल=पित्तशामक। काशी: अस्थमा औषधि। बड़े clinical trials नहीं, खीर=पौष्टिक+शीतल।#शरद पूर्णिमा#चन्द्र किरणें#औषधि
लक्ष्मी उपासनालक्ष्मी जी को सफेद मिठाई क्यों प्रिय हैलक्ष्मी + सफेद: (1) श्वेत रूप — श्वेत वस्त्र, कमल, हाथी। (2) क्षीरसागर (दूध का समुद्र) से प्रकट। (3) दूध = समृद्धि प्रतीक। प्रिय: खीर, रसगुल्ला, पेड़ा, बर्फी, मिश्री, पंचामृत। लोक परम्परा — श्रद्धा से कोई भी सात्विक मिठाई मान्य।#लक्ष्मी#सफेद मिठाई#खीर
पर्वशरद पूर्णिमा पर खीर रखने की परंपरा का क्या कारण हैशरद पूर्णिमा खीर: (1) चन्द्रमा सोलह कलाओं में पूर्ण — अमृत वर्षा। (2) आयुर्वेद: शरद में पित्त बढ़ता है, चन्द्र किरण + खीर = शीतल, पित्तशामक। (3) भागवत: कृष्ण रासलीला रात्रि। (4) कोजागरी: लक्ष्मी जागने वालों को धन देती हैं। चाँदनी में रखकर प्रातः प्रसाद।#शरद पूर्णिमा#खीर#चन्द्रमा
पूजा सामग्रीदुर्गा जी को कौन सा भोग चढ़ाया जाता है?दुर्गा को प्रिय भोग: खीर (सर्वोत्तम), हलवा-पूरी-काला चना (नवरात्रि में), पंचमेवा, फल। नवदुर्गा का प्रत्येक दिन अलग भोग है — दिन 1 घी, दिन 3 खीर, दिन 5 केला, दिन 9 तिल। भोग सदा सात्विक, ताजा और प्याज-लहसुन रहित।#दुर्गा भोग#नैवेद्य#हलवा