विस्तृत उत्तर
अग्नि पुराण स्वयं भगवान अग्निदेव के मुख से महर्षि वशिष्ठ को सुनाया गया था — इसीलिए इसका नाम अग्नि पुराण है। इसमें ३८३ अध्याय और लगभग ११,४७५ श्लोक हैं। स्वयं अग्निदेव ने इसे परिचय देते हुए कहा — 'आग्नेये हि पुराणेऽस्मिन् सर्वा विद्याः प्रदर्शिताः' — अर्थात् इस पुराण में सभी विद्याओं का वर्णन है। विद्वानों ने इसे 'भारतीय जीवन का विश्वकोश' कहा है।
अग्नि पुराण उन्हें विशेष रूप से पढ़ना चाहिए जो विविध विषयों का सांगोपांग ज्ञान पाना चाहते हैं। इसमें विष्णु के दशावतारों की कथा, रामायण और महाभारत का संक्षेप, पूजा विधि, होम विधि, मूर्ति-लक्षण, देवालय-निर्माण, वास्तु-शास्त्र, खगोल-शास्त्र, ज्योतिष, आयुर्वेद, धनुर्वेद, नीतिशास्त्र, छन्द-शास्त्र, अलंकार और व्याकरण — यह सब एक ही ग्रन्थ में मिलता है। यह पुराण ब्राह्मण, विद्यार्थी और जिज्ञासु सभी के लिए उपयोगी है।
पाठ के लिए कोई विशेष प्रतिबन्ध नहीं है — शुद्ध मन और श्रद्धा के साथ कभी भी पढ़ा जा सकता है। विशेष अनुष्ठान के समय — जैसे गृह-प्रवेश, मूर्ति-प्रतिष्ठा आदि — इसके सम्बन्धित अध्यायों का पाठ करना विशेष फलदायी माना गया है। इसका शिव, विष्णु और सूर्य तीनों की उपासना का निष्पक्ष वर्णन इसे सर्व-सम्प्रदाय के भक्तों के लिए उपयोगी बनाता है।




