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पद्म पुराण का मुख्य विषय क्या है?

पद्म पुराण वैष्णव पुराण है जिसमें ५५,००० श्लोक हैं। इसका मुख्य विषय भगवान विष्णु की उपासना है।

संक्षिप्त उत्तर

पद्म पुराण वैष्णव पुराण है जिसमें ५५,००० श्लोक हैं। इसका मुख्य विषय भगवान विष्णु की उपासना है। साथ ही राम-कृष्ण चरित्र, तीर्थ-माहात्म्य, तुलसी-महिमा, शालग्राम-स्वरूप और व्रत-विधियाँ हैं। यह पाँच (या सात) खण्डों में विभाजित है।

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विस्तृत उत्तर

पद्म पुराण अठारह महापुराणों में श्लोकसंख्या की दृष्टि से द्वितीय स्थान पर है — इसमें ५५,००० श्लोक हैं। आकार में केवल स्कन्द पुराण ही इससे बड़ा है। 'पद्म' का अर्थ है कमल। चूँकि भगवान नारायण की नाभि के कमल से ब्रह्माजी प्रकट हुए और उन्होंने सृष्टि-रचना का ज्ञान प्राप्त किया — इसीलिए इस पुराण को पद्म पुराण कहते हैं। यह पुराण सर्वप्रथम ब्रह्माजी ने पुलस्त्य ऋषि को और फिर पुलस्त्य ने भीष्म को सुनाया।

पद्म पुराण मूलतः वैष्णव पुराण है। इसमें भगवान विष्णु की उपासना पर सर्वाधिक बल दिया गया है। इस पुराण के मुख्य विषयों में सृष्टि की उत्पत्ति, ब्रह्मा द्वारा सृष्टि-रचना, राम और कृष्ण के चरित्र, विभिन्न तीर्थों का माहात्म्य, शालग्राम का स्वरूप और महिमा, तुलसी-महिमा, श्रीसूक्त और व्रत-उपासना की विधियाँ हैं। यह पुराण मुख्यतः पाँच खण्डों में विभाजित है — सृष्टि खण्ड, भूमि खण्ड, स्वर्ग खण्ड, पाताल खण्ड और उत्तर खण्ड। कुछ संस्करणों में ब्रह्म खण्ड और क्रियायोगसार खण्ड भी जुड़े हैं। उत्तर खण्ड में भगवान श्रीराम के अश्वमेध यज्ञ की कथा, अयोध्या-माहात्म्य और राधा-कृष्ण का वर्णन विशेष रूप से मिलता है।

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पद्म पुराण का मुख्य विषय क्या है को संदर्भ सहित समझें

पद्म पुराण का मुख्य विषय क्या है का सबसे सीधा सार यह है: पद्म पुराण वैष्णव पुराण है जिसमें ५५,००० श्लोक हैं। इसका मुख्य विषय भगवान विष्णु की उपासना है। साथ ही राम-कृष्ण चरित्र, तीर्थ-माहात्म्य, तुलसी-महिमा, शालग्राम-स्वरूप और व्रत-विधियाँ हैं। यह...

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