विस्तृत उत्तर
भगवद गीता के रचयिता और इसकी पृष्ठभूमि का वर्णन महाभारत के भीष्म पर्व में मिलता है:
गीता की रचना और स्रोत
वक्ता: भगवान श्री कृष्ण
श्रोता: अर्जुन
लेखक: महर्षि वेदव्यास (वेदव्यास ने महाभारत लिखा जिसका यह भाग है)
स्थान: कुरुक्षेत्र का युद्ध मैदान
समय: महाभारत युद्ध के प्रथम दिन, युद्ध आरंभ से पूर्व
भाषा: संस्कृत
महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण
गीता 'वेदव्यास ने लिखी' और 'कृष्ण ने कही' — दोनों कथन सही हैं। वेदव्यास ने महाभारत लिखी जिसमें भीष्म पर्व के अध्याय 23 से 40 भगवद्गीता हैं। किंतु ज्ञान कृष्ण जी का है।
गीता की संरचना
- ▸कुल अध्याय: 18
- ▸कुल श्लोक: 700
- ▸18 का महत्व: 18 अध्याय, 18 दिन का युद्ध, महाभारत के 18 पर्व, 18 अक्षौहिणी सेना
18 अध्यायों का संक्षेप
| अध्याय | नाम | विषय |
|--------|-----|-------|
| 1 | अर्जुन विषाद योग | अर्जुन का मोह और शोक |
| 2 | सांख्य योग | आत्मज्ञान, स्थितप्रज्ञ |
| 3 | कर्म योग | निष्काम कर्म |
| 4 | ज्ञान योग | अवतार रहस्य |
| 5 | कर्म-संन्यास योग | कर्म और संन्यास |
| 6 | ध्यान योग | ध्यान की विधि |
| 7 | ज्ञान-विज्ञान योग | ईश्वर ज्ञान |
| 8 | अक्षर ब्रह्म योग | परब्रह्म |
| 9 | राज विद्या योग | भक्ति रहस्य |
| 10 | विभूति योग | ईश्वर की विभूतियाँ |
| 11 | विश्वरूप दर्शन योग | कृष्ण का विराट रूप |
| 12 | भक्ति योग | भक्त के लक्षण |
| 13 | क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ योग | शरीर और आत्मा |
| 14 | गुणत्रय विभाग योग | तीन गुण |
| 15 | पुरुषोत्तम योग | परम पुरुष |
| 16 | दैव-आसुर विभाग | दैवी-आसुरी प्रकृति |
| 17 | श्रद्धात्रय विभाग | तीन प्रकार की श्रद्धा |
| 18 | मोक्ष-संन्यास योग | सर्वधर्म समर्पण |
गीता का सर्वाधिक प्रसिद्ध श्लोक
> 'यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।
> अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥' (4.7)
— जब-जब धर्म की हानि होती है, मैं अवतार लेता हूँ।





