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गीता परिचय📜 महाभारत — भीष्म पर्व, श्रीमद्भगवद्गीता (18 अध्याय), वेदव्यास3 मिनट पठन

भगवद गीता किसने लिखी?

संक्षिप्त उत्तर

भगवद गीता महर्षि वेदव्यास रचित महाभारत (भीष्म पर्व) का भाग है — किंतु ज्ञान भगवान श्री कृष्ण का है जो उन्होंने अर्जुन को कुरुक्षेत्र में सुनाया। 18 अध्याय, 700 श्लोक। सांख्य योग, कर्म योग, भक्ति योग और ज्ञान योग — चार मुख्य मार्ग।

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विस्तृत उत्तर

भगवद गीता के रचयिता और इसकी पृष्ठभूमि का वर्णन महाभारत के भीष्म पर्व में मिलता है:

गीता की रचना और स्रोत

वक्ता: भगवान श्री कृष्ण

श्रोता: अर्जुन

लेखक: महर्षि वेदव्यास (वेदव्यास ने महाभारत लिखा जिसका यह भाग है)

स्थान: कुरुक्षेत्र का युद्ध मैदान

समय: महाभारत युद्ध के प्रथम दिन, युद्ध आरंभ से पूर्व

भाषा: संस्कृत

महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण

गीता 'वेदव्यास ने लिखी' और 'कृष्ण ने कही' — दोनों कथन सही हैं। वेदव्यास ने महाभारत लिखी जिसमें भीष्म पर्व के अध्याय 23 से 40 भगवद्गीता हैं। किंतु ज्ञान कृष्ण जी का है।

गीता की संरचना

  • कुल अध्याय: 18
  • कुल श्लोक: 700
  • 18 का महत्व: 18 अध्याय, 18 दिन का युद्ध, महाभारत के 18 पर्व, 18 अक्षौहिणी सेना

18 अध्यायों का संक्षेप

| अध्याय | नाम | विषय |

|--------|-----|-------|

| 1 | अर्जुन विषाद योग | अर्जुन का मोह और शोक |

| 2 | सांख्य योग | आत्मज्ञान, स्थितप्रज्ञ |

| 3 | कर्म योग | निष्काम कर्म |

| 4 | ज्ञान योग | अवतार रहस्य |

| 5 | कर्म-संन्यास योग | कर्म और संन्यास |

| 6 | ध्यान योग | ध्यान की विधि |

| 7 | ज्ञान-विज्ञान योग | ईश्वर ज्ञान |

| 8 | अक्षर ब्रह्म योग | परब्रह्म |

| 9 | राज विद्या योग | भक्ति रहस्य |

| 10 | विभूति योग | ईश्वर की विभूतियाँ |

| 11 | विश्वरूप दर्शन योग | कृष्ण का विराट रूप |

| 12 | भक्ति योग | भक्त के लक्षण |

| 13 | क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ योग | शरीर और आत्मा |

| 14 | गुणत्रय विभाग योग | तीन गुण |

| 15 | पुरुषोत्तम योग | परम पुरुष |

| 16 | दैव-आसुर विभाग | दैवी-आसुरी प्रकृति |

| 17 | श्रद्धात्रय विभाग | तीन प्रकार की श्रद्धा |

| 18 | मोक्ष-संन्यास योग | सर्वधर्म समर्पण |

गीता का सर्वाधिक प्रसिद्ध श्लोक

> 'यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।

> अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥' (4.7)

— जब-जब धर्म की हानि होती है, मैं अवतार लेता हूँ।

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शास्त्रीय स्रोत
महाभारत — भीष्म पर्व, श्रीमद्भगवद्गीता (18 अध्याय), वेदव्यास
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