विस्तृत उत्तर
ब्रह्मा जी सृष्टिकर्ता होने के बावजूद उनके बहुत कम मंदिर हैं (राजस्थान का पुष्कर प्रमुख) और उनकी नियमित पूजा बहुत कम होती है। इसके पीछे कई पौराणिक कारण बताए गए हैं।
प्रमुख कारण (पौराणिक कथाएँ)
- 1शिव का शाप (शिव पुराण): एक बार ब्रह्मा और विष्णु में शिवलिंग के आदि-अंत खोजने की प्रतियोगिता हुई। ब्रह्मा ने केतकी पुष्प को झूठी गवाही देने के लिए कहा कि उन्होंने शिवलिंग का शिखर देख लिया। शिवजी ने क्रोधित होकर शाप दिया कि ब्रह्मा की पूजा नहीं होगी।
- 1सरस्वती/सावित्री का शाप (पद्म पुराण/ब्रह्मवैवर्त पुराण): एक यज्ञ में पत्नी सावित्री के विलंब से क्रुद्ध ब्रह्मा ने गायत्री नामक कन्या से विवाह कर लिया। इससे क्रुद्ध सावित्री (सरस्वती) ने शाप दिया कि पृथ्वी पर ब्रह्मा की पूजा नहीं होगी।
- 1सृष्टि कार्य पूर्ण: एक दार्शनिक व्याख्या यह है कि ब्रह्मा का कार्य सृष्टि रचना था जो पूर्ण हो चुका। विष्णु (पालनकर्ता) और शिव (संहारकर्ता) का कार्य निरंतर है, इसलिए उनकी पूजा निरंतर होती है।
पुष्कर (राजस्थान): विश्व का एकमात्र प्रमुख ब्रह्मा मंदिर पुष्कर में है। कार्तिक पूर्णिमा पर यहाँ ब्रह्मा जी का विशेष पूजन होता है।
ध्यान दें: ये पौराणिक कथाएँ हैं और विभिन्न पुराणों में विवरण भिन्न-भिन्न मिलता है। ब्रह्मा जी सृष्टिकर्ता के रूप में सदैव पूजनीय हैं — उनकी पूजा 'कम' होती है, 'नहीं' होती ऐसा कहना पूर्णतः सटीक नहीं।





