विस्तृत उत्तर
हिंदू धर्म में त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) और उनकी शक्तियां (पत्नियां) एक-दूसरे के पूरक हैं। शक्ति के बिना शिव 'शव' हैं — यह तांत्रिक सिद्धांत है।
त्रिदेव और उनकी शक्तियां
1ब्रह्मा — सरस्वती
- ▸ब्रह्मा = सृष्टिकर्ता।
- ▸सरस्वती = ज्ञान, विद्या, कला, वाणी की देवी।
- ▸ब्रह्मा सृष्टि रचते हैं, सरस्वती उसमें ज्ञान और व्यवस्था देती हैं।
- ▸वाहन: ब्रह्मा — हंस, सरस्वती — हंस।
2विष्णु — लक्ष्मी
- ▸विष्णु = पालनकर्ता, स्थिति (संरक्षण)।
- ▸लक्ष्मी = धन, समृद्धि, सौभाग्य, ऐश्वर्य की देवी।
- ▸विष्णु संसार का पालन करते हैं, लक्ष्मी समृद्धि और सुख प्रदान करती हैं।
- ▸विष्णु के प्रत्येक अवतार में लक्ष्मी भी अवतार लेती हैं (राम-सीता, कृष्ण-रुक्मिणी)।
- ▸वाहन: विष्णु — गरुड़, लक्ष्मी — उल्लू (उत्तर भारत), कमल पर विराजमान।
3महेश (शिव) — पार्वती
- ▸शिव = संहारकर्ता, पुनर्निर्माण।
- ▸पार्वती = शक्ति, प्रेम, भक्ति, गृहस्थ की देवी।
- ▸पार्वती के अन्य रूप: दुर्गा (रक्षा), काली (विनाश), अन्नपूर्णा (अन्न)।
- ▸'शक्ति' = पार्वती। शिव और शक्ति का अर्धनारीश्वर रूप दोनों की एकता दर्शाता है।
- ▸वाहन: शिव — नंदी (बैल), पार्वती — सिंह/शेर (दुर्गा रूप में)।
शक्ति सिद्धांत (शाक्त दर्शन)
- ▸देवी महात्म्य (मार्कण्डेय पुराण) के अनुसार शक्ति (देवी) ही परम सत्ता है — ब्रह्मा, विष्णु, शिव उनकी शक्ति से ही कार्य करते हैं।
- ▸*'या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता'* — सभी प्राणियों में शक्ति रूप में देवी विद्यमान हैं।





