मंत्र साधनादत्तात्रेय मंत्र 'ॐ द्रां' के चमत्कारी अनुभव'द्रां' बीज मंत्र त्रिदेवों की संयुक्त ऊर्जा है। इसके जप से भारी से भारी पितृ दोष और काले जादू का प्रभाव कट जाता है तथा साधक को सूक्ष्म गुरुओं का मार्गदर्शन प्राप्त होता है।#दत्तात्रेय#द्रां बीज#त्रिदेव
शिव पूजा विधिबेलपत्र की तीन पत्तियों का शिव पूजा में क्या प्रतीकात्मक अर्थ है?तीन पत्तियों के प्रतीकात्मक अर्थ: शिव के त्रिनेत्र। त्रिदेव (ब्रह्मा-विष्णु-महेश)। त्रिगुण (सत्त्व-रज-तम)। तीन शक्तियां (इच्छा-ज्ञान-क्रिया)। त्रिकाल (भूत-वर्तमान-भविष्य)। ॐ के तीन अक्षर (अ-उ-म)। त्रिशूल का प्रतीक। केवल त्रिदलीय बेलपत्र ही शिव को अर्पित करें।
देवता ज्ञानत्रिदेव — ब्रह्मा, विष्णु, महेश में कौन सबसे बड़ा?इसका कोई एकमात्र उत्तर नहीं — शिव पुराण में शिव, विष्णु पुराण में विष्णु सर्वोच्च। समन्वित सिद्धांत: त्रिदेव एक ही ब्रह्म के तीन रूप (सृष्टि-स्थिति-संहार), कोई बड़ा-छोटा नहीं। स्कंद पुराण: 'शिव ही विष्णु, विष्णु ही शिव।'#त्रिदेव#ब्रह्मा विष्णु महेश#तुलना
शिव प्रतीकशिव के त्रिशूल के तीन शूलों का प्रतीकात्मक अर्थ क्या है?शिव पुराण: सृष्टि आरंभ में सत्व-रज-तम से त्रिशूल बना। विष्णु पुराण: विश्वकर्मा ने सूर्यांश से निर्माण किया। 7 अर्थ: त्रिगुण, त्रिकाल, त्रिदेव, त्रिलोक, तीन कष्ट (आधिदैविक-आधिभौतिक-आध्यात्मिक), तीन नाड़ियां (इड़ा-पिंगला-सुषुम्ना), पवित्रता।#त्रिशूल#तीन शूल#सत्व रज तम
मंत्र साधनादत्तात्रेय मंत्र के चमत्कारिक लाभभगवान दत्तात्रेय के 'ॐ द्रां दत्तात्रेयाय नमः' मंत्र के जप से त्रिदेवों की कृपा मिलती है। यह पितृ दोष, दरिद्रता और तंत्र-बाधाओं को नष्ट करने में अत्यंत चमत्कारिक है।#दत्तात्रेय#त्रिदेव#पितृ दोष
देवता ज्ञानब्रह्मा, विष्णु, महेश की पत्नियां और शक्तियां कौन?ब्रह्मा + सरस्वती (ज्ञान/विद्या), विष्णु + लक्ष्मी (धन/समृद्धि), शिव + पार्वती (शक्ति/प्रेम)। पार्वती = दुर्गा, काली, अन्नपूर्णा। शक्ति के बिना देव अधूरे — अर्धनारीश्वर। देवी महात्म्य: शक्ति ही परम सत्ता।#त्रिदेव#पत्नियां#शक्ति
स्तोत्र पाठबेलपत्र के मूल (जड़), मध्य और अग्र भाग में कौन से देवता रहते हैं?शास्त्रों के अनुसार बेलपत्र के मूल (निचले हिस्से) में ब्रह्मा, बीच में विष्णु और आगे के हिस्से में भगवान शिव का वास होता है।#त्रिदेव#मूल#अग्र भाग
शिव पूजा विधिबेलपत्र की तीन पत्तियों का शिव पूजा में क्या प्रतीकात्मक अर्थ है?तीन पत्तियों के प्रतीकात्मक अर्थ: शिव के त्रिनेत्र। त्रिदेव (ब्रह्मा-विष्णु-महेश)। त्रिगुण (सत्त्व-रज-तम)। तीन शक्तियां (इच्छा-ज्ञान-क्रिया)। त्रिकाल (भूत-वर्तमान-भविष्य)। ॐ के तीन अक्षर (अ-उ-म)। त्रिशूल का प्रतीक। केवल त्रिदलीय बेलपत्र ही शिव को अर्पित करें।#बेलपत्र#त्रिदल#प्रतीक
वृक्ष पूजापीपल पेड़ की पूजा कैसे करें?शनिवार सर्वोत्तम। जल+हल्दी+कुमकुम+दूध(जड़ में)→मौली बांधें→7 परिक्रमा→सरसों दीपक→'अश्वत्थाय नमः'। शनि शाम विशेष। पीपल=त्रिदेव+24 घंटे ऑक्सीजन।#पीपल#पूजा#विधि