ब्रह्मा + सरस्वती (ज्ञान/विद्या), विष्णु + लक्ष्मी (धन/समृद्धि), शिव + पार्वती (शक्ति/प्रेम)। पार्वती = दुर्गा, काली, अन्नपूर्णा। शक्ति के बिना देव अधूरे — अर्धनारीश्वर। देवी महात्म्य: शक्ति ही परम सत्ता।
- 1ब्रह्मा = सृष्टिकर्ता।
- 2सरस्वती = ज्ञान, विद्या, कला, वाणी की देवी।
- 3ब्रह्मा सृष्टि रचते हैं, सरस्वती उसमें ज्ञान और व्यवस्था देती हैं।
- 4वाहन: ब्रह्मा — हंस, सरस्वती — हंस।
- 5विष्णु = पालनकर्ता, स्थिति (संरक्षण)।
- 6लक्ष्मी = धन, समृद्धि, सौभाग्य, ऐश्वर्य की देवी।
- 7विष्णु संसार का पालन करते हैं, लक्ष्मी समृद्धि और सुख प्रदान करती हैं।
- 8विष्णु के प्रत्येक अवतार में लक्ष्मी भी अवतार लेती हैं (राम-सीता, कृष्ण-रुक्मिणी)।
- 9वाहन: विष्णु — गरुड़, लक्ष्मी — उल्लू (उत्तर भारत), कमल पर विराजमान।
- 10शिव = संहारकर्ता, पुनर्निर्माण।
- 11पार्वती = शक्ति, प्रेम, भक्ति, गृहस्थ की देवी।
- 12पार्वती के अन्य रूप: दुर्गा (रक्षा), काली (विनाश), अन्नपूर्णा (अन्न)।
- 13'शक्ति' = पार्वती। शिव और शक्ति का अर्धनारीश्वर रूप दोनों की एकता दर्शाता है।
- 14वाहन: शिव — नंदी (बैल), पार्वती — सिंह/शेर (दुर्गा रूप में)।
- 15देवी महात्म्य (मार्कण्डेय पुराण) के अनुसार शक्ति (देवी) ही परम सत्ता है — ब्रह्मा, विष्णु, शिव उनकी शक्ति से ही कार्य करते हैं।
- 16*'या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता'* — सभी प्राणियों में शक्ति रूप में देवी विद्यमान हैं।