विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवत पुराण हिन्दुओं के अठारह महापुराणों में से एक है और भक्ति-परम्परा का सर्वोच्च ग्रन्थ माना जाता है। इसके रचयिता महर्षि वेदव्यास हैं। इस पुराण में कुल बारह स्कन्ध, ३३५ अध्याय और १८,००० श्लोक हैं।
प्रत्येक स्कन्ध का विषय संक्षेप में इस प्रकार है। प्रथम स्कन्ध में भक्तियोग और वैराग्य तथा सभी अवतारों का सारांश है। द्वितीय स्कन्ध में ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति और विराट पुरुष का वर्णन है। तृतीय स्कन्ध में भगवान के बाल चरित्र का वर्णन उद्धव द्वारा किया गया है। चतुर्थ स्कन्ध में राजर्षि ध्रुव और पृथु का चरित्र है। पंचम स्कन्ध में सम्पूर्ण सृष्टि का स्वरूप — समुद्र, पर्वत, नरक — का वर्णन है। षष्ठ स्कन्ध में जीवों की उत्पत्ति और अजामिल की मोक्ष-कथा है। सप्तम स्कन्ध में प्रह्लाद-चरित्र और नवधा भक्ति का वर्णन है। अष्टम स्कन्ध में मनुओं और गजेन्द्र-मोक्ष की कथा है। नवम स्कन्ध में सूर्यवंश और चन्द्रवंश का वर्णन है। दशम स्कन्ध — जो सबसे प्रसिद्ध है — में श्रीकृष्ण की समग्र लीलाओं का विस्तृत वर्णन है। एकादश स्कन्ध में उद्धव-गीता और ज्ञान-वैराग्य है। द्वादश स्कन्ध में कलियुग का वर्णन और पुराण का उपसंहार है।





