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विस्तृत उत्तर
यमलोक ब्रह्मांड के दक्षिणी भाग में, भू-मण्डल के नीचे तथा गर्भोदक सागर के जल से तनिक ऊपर स्थित है। यह त्रिलोकी और गर्भोदक सागर के मध्य का वह रिक्त स्थान है जिसे पितृलोक का क्षेत्र भी कहा जाता है। पितृलोक की इसी परिधि में सूर्यपुत्र यमराज का मुख्य निवास स्थान और उनकी न्याय-सभा स्थित है। यमराज की सभा में पितृलोक के अधिपति अग्निष्वात्त आदि पितृगण भी विराजमान होते हैं, जो अपने वंशजों के कर्मों का अवलोकन करते हैं।
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