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विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार नरक या यमलोक ब्रह्मांड के दक्षिणी भाग में, भू-मण्डल के नीचे तथा गर्भोदक सागर के जल से तनिक ऊपर स्थित है। यह त्रिलोकी और गर्भोदक सागर के मध्य का रिक्त स्थान है, जिसे पितृलोक का क्षेत्र भी कहा जाता है। इसी क्षेत्र में यमराज का मुख्य निवास स्थान और उनकी न्याय-सभा स्थित है। इस स्थान का उद्देश्य जीवों के कर्मों का निष्पक्ष मूल्यांकन करना और प्राकृतिक न्याय की स्थापना करना है।
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