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विस्तृत उत्तर
भागवत पुराण और मार्कण्डेय पुराण के अनुसार, ब्रह्मा जी के शरीर के अंधकार और तामसिक अंश से कुछ भयंकर जीव उत्पन्न हुए। जब वे भूख-प्यास से प्रेरित होकर ब्रह्मा जी की ओर दौड़े, तो जिन जीवों ने जल की रक्षा करने का संकल्प लेकर 'रक्षामः', अर्थात हम रक्षा करेंगे, कहा, वे राक्षस कहलाए। यक्षों की उत्पत्ति के प्रसंग में भी बताया गया है कि जिन जीवों ने 'यक्षामः' कहा वे यक्ष बने और जिन्होंने 'रक्षामः' कहा वे राक्षस बने।
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