विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवत पुराण और मार्कण्डेय पुराण में यक्षों और राक्षसों की उत्पत्ति का दार्शनिक वर्णन मिलता है। जब सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा ने देवताओं, असुरों, पितरों और मनुष्यों की रचना की, उसके पश्चात उन्हें अत्यंत क्षुधा और पिपासा सताने लगी। उनके शरीर से तमस और रजोगुण के प्रभाव में कुछ जीवों की उत्पत्ति हुई। वे जीव क्षुधा के कारण ब्रह्मा जी की ओर दौड़े। उनमें से कुछ जीवों ने कहा 'यक्षामः', अर्थात हम खाएंगे या हम बलिदान करेंगे, और वे यक्ष कहलाए। जिन्होंने 'रक्षामः' कहा वे राक्षस बने। रामायण के उत्तरकाण्ड में अगस्त्य मुनि ने भी बताया कि जिन्होंने जल की रक्षा करने का प्रण लिया और 'यक्ष्यामि' कहा, वे यक्ष बने।
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