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विस्तृत उत्तर
भागवत पुराण तलातल के प्रसंग से यह दार्शनिक संदेश देता है कि माया के आवरण में फँसा हुआ जीव, चाहे वह मय दानव जितना बड़ा ज्ञानी और शिव का कृपापात्र ही क्यों न हो, भगवान की परम सत्ता और कालरूप सुदर्शन चक्र के प्रभाव को भूल सकता है। मय दानव को शिव से संरक्षण मिला और उसके भीतर यह मिथ्या अहंकार उत्पन्न हुआ कि अब उसे सुदर्शन चक्र से भी भय नहीं है। यह प्रसंग दिखाता है कि माया, ऐश्वर्य और सुरक्षा का भाव जीव को परम सत्य से विमुख कर सकता है।
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