विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवत पुराण के पंचम स्कंध के छब्बीसवें अध्याय में यमलोक के स्थान का स्पष्ट निर्धारण किया गया है। नरक या यमलोक ब्रह्मांड के दक्षिणी भाग में, भू-मण्डल अर्थात पृथ्वी के नीचे तथा गर्भोदक सागर के जल से तनिक ऊपर स्थित है। यह त्रिलोकी और गर्भोदक सागर के मध्य का वह रिक्त स्थान है जिसे पितृलोक का क्षेत्र भी कहा जाता है। पितृलोक की इसी परिधि में सूर्यपुत्र यमराज का मुख्य निवास स्थान और उनकी न्याय-सभा स्थित है, जहाँ उनके अधीनस्थ यमदूत पापियों को मृत्यु के पश्चात तत्काल लाते हैं।
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