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विस्तृत उत्तर
अग्नि पुराण के अध्याय 84 में आठ प्रकार की देवयोनियों का वर्णन है, जो पार्थिव तत्त्व से ऊपर उठती हुई चेतना के स्तर को दर्शाती हैं। इनका आरोही क्रम इस प्रकार है: प्रथम पिशाच, द्वितीय राक्षस, तृतीय यक्ष, चतुर्थ गन्धर्व, पंचम इन्द्र, षष्ठ सोम, सप्तम प्रजापति और अष्टम ब्रह्मा। इस क्रम में पिशाच सर्वाधिक तामसिक, मलिन और हिंसक हैं; राक्षस तामसिक-राजसिक, शक्तिशाली और अहंकारी हैं; और यक्ष राजसिक, धन-रक्षक तथा कुछ सीमा तक सात्त्विक हैं।
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