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राक्षस से जुड़े सभी प्रश्न(26)

राक्षस पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 26 प्रश्न उपलब्ध हैं।

दिव्यास्त्र

रात में घटोत्कच इतना खतरनाक क्यों था?

घटोत्कच अर्ध-राक्षस था इसलिए रात में उसकी मायावी शक्तियाँ कई गुना बढ़ जाती थीं। वह अदृश्य होकर आकाश से प्रहार करता था जिससे द्रोण-अश्वत्थामा जैसे योद्धा भी असहाय हो गए।

#घटोत्कच#रात#मायावी शक्ति
लोक

भुवर्लोक के राक्षस पाताल के असुरों से कैसे अलग हैं?

भुवर्लोक के राक्षस वायुमंडलीय और सूक्ष्म होते हैं जो अंतरिक्ष में विचरण करते हैं जबकि पाताल के असुर भूमि के नीचे रहने वाली स्थूल सत्ताएं हैं।

#भुवर्लोक#राक्षस#पाताल
दिव्यास्त्र

निवातकवच कौन थे?

निवातकवच समुद्र के नीचे अभेद्य किले में रहने वाले तीन करोड़ मायावी राक्षस थे जो देवताओं के लिए बड़ा खतरा थे।

#निवातकवच#राक्षस#मायावी
दिव्यास्त्र

अर्जुन ने वज्रास्त्र का उपयोग किस काम के लिए किया था?

अर्जुन ने वज्रास्त्र का उपयोग राक्षसों की माया नष्ट करने और तीन करोड़ निवातकवच राक्षसों का संहार करने के लिए किया था।

#अर्जुन#वज्रास्त्र#माया
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सूर्यास्त के बाद श्राद्ध क्यों नहीं?

सूर्यास्त के बाद श्राद्ध निष्फल माना गया है।

#सूर्यास्त श्राद्ध#निष्फल#राक्षस
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विश्वेदेव श्राद्ध को राक्षसों और पिशाचों से कैसे बचाते हैं?

विश्वेदेव श्राद्ध के रक्षक हैं; वे सुनिश्चित करते हैं कि पितृभाग राक्षस या पिशाच न ले जाएँ।

#विश्वेदेव#श्राद्ध रक्षा#राक्षस
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प्रेत, पिशाच, भूत, यक्ष और राक्षस योनियों से क्या शिक्षा मिलती है?

ये योनियाँ सिखाती हैं कि कर्म, मृत्यु-काल की आसक्ति और संस्कारों की अवहेलना आत्मा की गति तय करते हैं; धर्म और श्राद्ध-मुक्ति के मार्ग हैं।

#प्रेत#पिशाच#भूत
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अग्नि पुराण में देवयोनियों का क्रम क्या है?

अग्नि पुराण का क्रम है: पिशाच, राक्षस, यक्ष, गन्धर्व, इन्द्र, सोम, प्रजापति और ब्रह्मा।

#अग्नि पुराण#देवयोनियाँ#पिशाच
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पिशाच, राक्षस और यक्ष का पदानुक्रम क्या है?

अग्नि पुराण के अनुसार क्रम है: पिशाच, राक्षस, यक्ष; पिशाच सबसे तामसिक, राक्षस शक्तिशाली और यक्ष अधिक राजसिक-सात्त्विक हैं।

#पिशाच#राक्षस#यक्ष
लोक

राक्षस वैदिक यज्ञों से घृणा क्यों करते हैं?

राक्षस तामसिक और धर्म-विरोधी होते हैं; वे वैदिक यज्ञ, पूजा और धार्मिक अनुष्ठानों को नष्ट करना चाहते हैं।

#राक्षस#वैदिक यज्ञ#धर्म विरोध
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राक्षसों को निशाचर क्यों कहा जाता है?

राक्षसों की शक्ति रात, विशेषकर अमावस्या में बढ़ती है और वे रात में विचरण करते हैं, इसलिए उन्हें निशाचर कहा जाता है।

#निशाचर#राक्षस#रात्रि
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राक्षस योनि क्या है?

राक्षस योनि शक्तिशाली, मायावी, तामसिक और विध्वंसकारी अमानवीय योनि है, जो यज्ञ-विरोध और घोर अहंकार से जुड़ी है।

#राक्षस योनि#राक्षस#निशाचर
लोक

यक्षों की उत्पत्ति कैसे हुई?

ब्रह्मा के तमस-रजस से उत्पन्न जिन जीवों ने 'यक्षामः' या 'यक्ष्यामि' कहा, वे यक्ष कहलाए।

#यक्ष उत्पत्ति#ब्रह्मा#भागवत पुराण
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यक्ष पूर्णतः राक्षसी क्यों नहीं माने जाते?

यक्ष प्रकृति और धन के रक्षक अर्द्ध-दैवीय जीव हैं; उनमें तामसिक पक्ष है, पर वे पूर्णतः राक्षसी नहीं हैं।

#यक्ष#राक्षस#अर्द्ध दैवीय
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अथर्ववेद में पिशाचों के बारे में क्या प्रार्थना की गई है?

अथर्ववेद में पृथ्वी माता से पिशाचों, राक्षसों और अन्य अमानवीय शक्तियों को मनुष्यों से दूर रखने की प्रार्थना की गई है।

#अथर्ववेद#पिशाच#राक्षस
लोक

किर्मीर कौन था?

किर्मीर एक भयंकर मायावी राक्षस था, जिसका वध भीमसेन ने किया और जिसके नगर महातल से जुड़े बताए गए हैं।

#किर्मीर#भीमसेन#महातल
लोक

महातल में किर्मीर के नगर का क्या वर्णन है?

महातल में किर्मीर के नाम से जुड़े भव्य दैत्य नगर और उसकी दानवी सभ्यता का वर्णन मिलता है।

#किर्मीर#महातल#वायु पुराण
लोक

तलातल में सुमाली का नगर कैसा है?

सुमाली का नगर तलातल में विस्तृत और विशाल बताया गया है।

#सुमाली नगर#तलातल#विशाल नगर
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सुमाली कौन है?

सुमाली तलातल में रहने वाला बलशाली राक्षस है, जिसका विशाल नगर वहाँ स्थित है।

#सुमाली#तलातल#राक्षस
लोक

तलातल में नागों की कौन सी प्रजातियाँ रहती हैं?

तलातल में नागों की कुछ विशिष्ट और शक्तिशाली प्रजातियाँ रहती हैं।

#तलातल नाग#नाग प्रजाति#राक्षस
लोक

तलातल में कौन निवास करता है?

तलातल में दानव, दैत्य, मायावी असुर, कुछ नाग और शक्तिशाली राक्षस निवास करते हैं।

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लोक

मय दानव कौन है?

मय दानव दैत्यों-राक्षसों का सबसे बड़ा वास्तुकार और मायावी शिल्पकार है। वह तलातल लोक में रहता है और अतल लोक के राजा बल असुर का पिता है।

#मय दानव#वास्तुकार#तलातल
रामचरितमानस — बालकाण्ड

विश्वामित्रजी के यज्ञ में कौन से राक्षस बाधा डाल रहे थे?

विश्वामित्रजी ने कहा — 'असुर समूह सतावहिं मोही।' मार्ग में ताड़का का वध हुआ। वाल्मीकि रामायण के अनुसार मारीच और सुबाहु मुख्य राक्षस थे। मानस में संक्षिप्त वर्णन है।

#बालकाण्ड#राक्षस#यज्ञ बाधा
रामचरितमानस — बालकाण्ड

विश्वामित्रजी राजा दशरथ के पास क्यों आये?

राक्षसों के समूह विश्वामित्रजी के यज्ञ में बाधा डाल रहे थे। उन्होंने दशरथ से कहा — 'असुर समूह सतावहिं मोही' — राम-लक्ष्मण को दो, राक्षसों के वध से मैं सनाथ हो जाऊँगा।

#बालकाण्ड#विश्वामित्र#दशरथ
रामचरितमानस — बालकाण्ड

ब्राह्मणों ने प्रतापभानु को क्या शाप दिया?

'जाइ निसाचर होहु नृप मूढ़ सहित परिवार' — मूर्ख राजा, परिवारसहित जाकर राक्षस हो जा। ब्राह्मणों ने कहा — तूने हमें मारने का प्रयत्न किया, ईश्वर ने धर्म रक्षा की, अब तू परिवारसहित नष्ट होगा।

#बालकाण्ड#ब्राह्मण शाप#निशाचर
रामचरितमानस — बालकाण्ड

शिवगणों ने नारदजी को कौन सा शाप दिया?

नारदजी ने शिवगणों को शाप दिया (उल्टा नहीं)। शिवगणों ने वानर-मुख पर हँसी की, तो नारदजी ने शाप दिया — 'होहु निसाचर जाइ तुम्ह कपटी पापी दोउ' — तुम दोनों जाकर राक्षस हो जाओ।

#बालकाण्ड#शिवगण#नारद शाप
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