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विस्तृत उत्तर
राक्षस वैदिक यज्ञों, प्रार्थनाओं और धार्मिक अनुष्ठानों से घृणा करते हैं और उन्हें नष्ट करने का प्रयास करते हैं। राक्षस योनि तामसिक-राजसिक, विध्वंसकारी और घोर अहंकार से जुड़ी है। जो मनुष्य समाज में जानबूझकर धार्मिक अनुष्ठानों, यज्ञों और पूजा-पाठ को नष्ट करते हैं, ऋषियों, संतों या सज्जनों की हत्या करते हैं, और वैदिक नियमों का उपहास करते हैं, वे अपने तामसिक-रजोगुणी कर्म के कारण अगले जन्म में राक्षस योनि प्राप्त करते हैं।
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