विस्तृत उत्तर
ब्राह्मणों ने प्रतापभानु को शाप दिया — 'जाइ निसाचर होहु नृप मूढ़ सहित परिवार' — अरे मूर्ख राजा! तू जाकर परिवारसहित राक्षस (निशाचर) हो जा।
आगे और ब्राह्मणों ने कहा — 'छत्रबंधु तैं बिप्र बोलाई। घालै लिए सहित समुदाई। ईस्वर राखा धरम हमारा। जैहसि तैं समेत परिवारा॥'
इसका अर्थ — हे क्षत्रियबन्धु (क्षत्रिय कहलाने योग्य भी नहीं)! तूने ब्राह्मणों को बुलाकर समुदायसहित मारने (नाश करने) का प्रयत्न किया। ईश्वरने हमारे धर्म की रक्षा की। अब तू परिवारसहित (राक्षस होकर) जायगा (नष्ट होगा)।
यह शाप इतना भयंकर था कि प्रतापभानु जैसा धर्मात्मा चक्रवर्ती राजा अगले जन्म में रावण बना — और उसका सारा परिवार राक्षस कुल में जन्मा।





