विस्तृत उत्तर
बालकाण्ड में विश्वामित्रजी ने राजा दशरथ से कहा — 'असुर समूह सतावहिं मोही' — राक्षसों का समूह मुझे सताता है। मानस में विशेष राक्षसों के नाम का विस्तृत उल्लेख संक्षिप्त है।
मार्ग में ताड़का का वध हुआ। फिर विश्वामित्रजी ने रामजी को अनेक दिव्यास्त्र दिये और यज्ञ रक्षा हुई।
वाल्मीकि रामायण के अनुसार मुख्य राक्षस मारीच और सुबाहु थे जो विश्वामित्रजी के यज्ञ में रक्त और हड्डियाँ फेंककर अशुद्ध करते थे। बालकाण्ड में कहा — मुनि ने रामजी को विद्यानिधि (अस्त्र-शस्त्र) दिये और फिर यज्ञ निर्विघ्न सम्पन्न हुआ।





