विस्तृत उत्तर
अग्नि पुराण, ब्रह्मांड पुराण और अन्य शास्त्रों के अनुसार, जिन मनुष्यों की मृत्यु अत्यंत हिंसक तरीके से होती है—जैसे युद्ध में अकाल मृत्यु, किसी दुर्घटना में कुचलकर मृत्यु, या अचानक हत्या—और जिन्हें अपनी मृत्यु की परिस्थिति को समझने या स्वीकार करने का मानसिक अवसर नहीं मिलता, वे भूत बन जाते हैं। इस अचानक झटके के कारण उनका सूक्ष्म शरीर पृथ्वी के वातावरण में ही अटका रहता है। यदि उचित वैदिक अंत्येष्टि संस्कार न किया जाए, तो हिंसक मृत्यु को प्राप्त जीव भूत योनि में स्थायी रूप से आबद्ध हो जाते हैं।
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